Admission assistance

प्रवेश सम्बन्धी नियम

1. प्रत्येक कक्षा में प्रवेश के लिए सर्वप्रथम चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में On Line  रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।
2. प्रवेश के लिये महाविद्यालय में मूल प्रमाण पत्रों सहित छात्रा का स्वयम् उपस्थित होना आवश्यक है। छात्रा के स्वयं न आने की स्थिति में फोटो प्रमाणित नहीं हो पायेगा। अतः उस दिन प्रवेश भी नहीं मिल सकेगा।
3. कुछ अमान्य बोर्ड एवम् परीक्षा-इन प्रमाण पत्रों वाली छात्रा को विश्वविद्यालय के किसी भी संकाय में प्रवेश नहीं मिल सकेगा।
1 अखिल भारतीय शिक्षा परिषद, दिल्ली
2 केन्द्रीय उच्चतर शिक्षा परिषद, उत्तम नगर, दिल्ली
3 केन्द्रीय उच्च शिक्षा परिषद, पूर्व पटेल नगर, नई दिल्ली
4 वयस्क एवं तकनीकी परिषद, अलीगंज मुबारकपुर, नई दिल्ली
5 गुरुकुल विश्वविद्यालय, वृंदावन
6 साहित्य सम्मेलन प्रयाग
7 आबिद, कामिल परीक्षा जामिया-ए-उर्दू, अलीगढ़
4. आरक्षित स्थान, अर्ह अभ्यार्थियों के उपलब्ध न होने के कारण रिक्त रह जाने पर प्रवेश के लिए निर्धारित अंतिम तिथि के  15 दिन बाद सामान्य श्रेणी के अभ्यार्थियों से भरे जा सकते हैं।
5. मनोविज्ञान विषय लेने के लिए छात्रा के पास इण्टरमीडिएट कक्षा में मनोविज्ञान विषय होना चाहिये अथवा इण्टरमीडिएट में प्रथम श्रेणी प्राप्त अथवा विज्ञान की छात्रा भी, यदि मनोविज्ञान विषय चाहती है, तो वह विषय ले सकती है।
6. संगीत विषय केवल उन्हीं छात्राओं को दिया जा सकेगा जिन्होंने इण्टरमीडिएट अथवा समकक्ष परीक्षा संगीत विषय लेकर उत्तीर्ण की हो। जिनके पास इण्टरमीडिएट में संगीत विषय नहीं है लेकिन फिर भी संगीत लेना चाहती हैं, उन्हें संगीत विभाग की अध्यक्षा के सम्मुख स्वर-परीक्षा देनी होगी, उसके उपरान्त उन्हें विषय मिल सकेगा।
 
बी0 ए0 प्रथम वर्ष-
1 बी0ए0 में प्रवेश पाने वाले अभ्यर्थी के, जिसने इण्टरमीडिएट विज्ञान, वाणिज्य और कृषि पाठ्यक्रम से उत्तीर्ण किया है, अर्हता परीक्षा के प्राप्तांक प्रतिशत में से (योग्यता की गणना के लिए) 5 प्रतिशत घटा दिए जायेंगे।
2 अंग्रेजी साहित्य लेने के लिए इण्टरमीडिएट में अंग्रेजी विषय में न्यूनतम 45ः अंक होना आवश्यक हैै।
3 गृहविज्ञान लेने के लिए इण्टरमीडिएट कक्षा में गृहविज्ञान विषय में 55ः आवश्यक है। विज्ञान विषय से उत्तीर्ण छात्रा भी गृहविज्ञान ले सकती है।
 
द्वितीय एवं तृतीय वर्ष-
परीक्षा परिणाम घोषित होने के उपरान्त तीन दिन के अन्दर उत्तीर्ण छात्राएं प्रवेश ले लें।
बैक पेपर की दशा में छात्रा को प्रोविज़नल प्रवेश दिया जाएगा। यदि छात्रा बैक पेपर में उत्तीर्ण नहीं होती तो उसका प्रवेश निरस्त कर दिया जाएगा, जिसका सम्पूर्ण दायित्व छात्रा का होगा।
 
बी0एड0
उत्तर प्रदेश शासन, चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ तथा राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद्, नई दिल्ली द्वारा मान्यता प्राप्त शिक्षण-प्रशिक्षण पाठ्यक्रम संचालित करने वाला विश्वविद्यालय में एकमात्र महिला महाविद्यालय है। 
प्रवेश के नियम- उत्तर प्रदेश बी0एड0 संयुक्त प्रवेश परीक्षा के आधार पर योग्यता क्रमानुसार होता है।
 
स्नातकोत्तर कक्षाएँ
एम0ए0 (सेमेस्टर प्रणाली)
1 उच्चतम शिक्षा प्राप्त, सुयोग्य एवं कुशल शिक्षिकाओं के निर्देशन में महाविद्यालय में चार विषयों में स्नातकोत्तर स्तर पर शिक्षण व्यवस्था है-हिन्दी, अंग्रेजी, राजनीति शास्त्र तथा संगीत गायन।
2 प्रवेश नियम-प्रवेश विश्वविद्यालय के नियमानुसार दिया जायेगा। प्रवेश के लिए सर्वप्रथम चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में व्द स्पदम रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है।
3 सभी विषयों में प्रवेश पूर्व परीक्षा के प्राप्ताकों के आधार पर योग्यताक्रमानुसार, तथा चौ0 चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के नियमानुसार दिया जायेगा।
4 जिस विषय में छात्रा प्रवेश लेना चाहती है, वह विषय स्नातक स्तर पर होना अनिवार्य है।
 
उत्तरार्द्ध (द्वितीय वर्ष) 
1 एम0ए0 प्प् की परीक्षा भी सेमेस्टर प्रणाली से होगी।
2 पूर्वार्द्ध के परीक्षा परिणाम निकलने के बाद तीन दिन में एम0 ए0 उत्तरार्द्ध में प्रवेश लेना आवश्यक है।
 
एम0एड0
1 शिक्षण-प्रशिक्षण के स्नातकोत्तर स्तर के इस पाठ्यक्रम में प्रवेश विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा एवं मानकांे के आधार पर निर्धारित योग्यता वरीयता के आधार पर होता है।
 
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ
सत्र 2012-13 के लिए सम्बद्ध
महाविद्यालयों/ संस्थानों के लिए
प्रवेश के नये नियम
 
1. महाविद्यालयों/स्ववित्त पोषित संस्थानों में प्रवेश और शिक्षण कार्यक्रम की प्रक्रिया का पालन विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार किया जाएगा।
(क) प्रथमतः महाविद्यालयों/संस्थानों द्वारा किये गये सभी प्रवेश विश्वविद्यालय द्वारा स्क्रूटनी के बाद सत्यापित किये जाने।
(ख) प्रवेश, प्रवेश परीक्षा अथवा अर्हता परीक्षा में कुल प्राप्तांक प्रतिशत के आधार पर तथा अन्य निर्धारित मानकों के  आधार पर किये जायेंगे, लिंग (महिला महाविद्यालयों के अतिरिक्त) जाति पंथ एवं धर्म के आधार पर नहीं। प्रवेशार्थ मान्य कुल स्थानों में से 21 प्रतिशत, 2 प्रतिशत और 27 प्रतिशत स्थान महाविद्यालयों में और इसी प्रकार छात्रावासों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों से सम्बन्धित अभ्यार्थियों के लिए आरक्षित होगें। शारीरिक रूप से 50 प्रतिशत से अधिक विकलांग, दृष्टि विहीन /कम दृष्टि (एक प्रतिशत)/श्रवण ह्नास/पालन निशकत्ता एक प्रतिशत, अंग भंग 1 प्रतिशत (कुल 3 प्रतिशत) स्वतन्त्रता सेनानियों के आश्रित 2 प्रतिशत और सेना कर्मियों या उनके आश्रितों को 1 प्रतिशत स्थानों पर सम्बन्धित श्रेणियों में आरक्षण प्रदान किया जायेगा। स्वतन्त्रता सेनानियों के आश्रित और पूर्व सेना कर्मियों या उनके आश्रित अभ्यर्थियों को क्रमशः 1 प्रतिशत, 2 प्रतिशत और 1 प्रतिशत स्थानों पर  सम्बन्धित श्रेणियों में आरक्षण प्रदान किया जायेगा। यदि अनुसूचित जनजाति अभ्यर्थी प्रवेश के लिये    उपलब्ध नहीं हैं तो उनके स्थान पर अनुसूचित जाति के अर्ह अभ्यर्थी को प्रवेश दिया जाएगा।
आरक्षित स्थान, अर्ह अभ्यार्थियों के उपलब्ध न होने के कारण रिक्त रह जाने पर, प्रवेश के लिए निर्धारित अन्तिम तिथि के 15 दिन बाद औचित्य स्थापित करते हुए सामान्य श्रेणी के अभ्यार्थियों से भरे जा सकते हैं।
अनुसूचित वर्ग के अभ्यर्थी के लिए छात्रावास में आवास, प्रवेश की अन्तिम तिथि तक आरक्षित रखें जायेंगे।
उत्तर प्रदेश के मूल निवासी अभ्यर्थी को, जिसने प्रवेश हेतु आवश्यक योग्यता परीक्षा उत्तर प्रदेश राज्य के बाहर से उत्तीर्ण की हैं, किन्तु उत्तर प्रदेश के मूल निवासी के रूप में प्रवेश का इच्छुक है, सक्षम अधिकारियों द्वारा उत्तर प्रदेश का मूल निवास प्रमाण-पत्र एवं आरक्षण प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होगा, अन्यथा वह अन्य प्रदेश की श्रेणी में माना जाएगा।
(ग) अन्य प्रदेश के अभ्यार्थियों के प्रवेश अधिकतम 10 प्रतिशत तक की सीमा तक होंगे, प्रतिबन्ध यह होगा कि अर्हता परीक्षा में उनकी योग्यता उत्तर प्रदेश के सामान्य श्रेणी अभ्यार्थियों से कम न हो। कोई अभ्यर्थी जो कि दूसरे राज्य का निवासी है, उत्तर प्रदेश के किसी महाविद्यालय/संस्थान से अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण करने पर भी दूसरे राज्य की श्रेणी में ही रखा जायेगा।
(घ) (1) किसी भी सरकारी कर्मचारी और दूसरे सार्वजनिक सेवा वाले कर्मचारियों के पुत्र/पुत्री का प्रवेश उनके माता-पिता का स्थानान्तरण सम्बंधित महाविद्यालय में स्थान होने पर कुलपति या उनके द्वारा मनोनीत अधिकारी की पूर्व अनुमति से स्वीकार्य होगा। ऐसे स्थानान्तरण केवल प्रवेश की अन्तिम तिथि से एक माह के अन्तर्गत अथवा विलम्बतम 31 अक्टूबर तक ही स्वीकार्य होंगे। 31 अक्टूबर 2011 (वार्षिक प्रणाली के अन्तर्गत) के बाद किसी भी स्थिति में स्थानान्तरण स्वीकार्य नहीं होंगे। सेमेस्टर सिस्टम में स्थानान्तरण प्प्प्ध्ट सेमेस्टर में ही अनुमन्य किया जा सकेगा लेकिन वर्ष की 31 अगस्त के बाद (सेमेस्टर सिस्टम में) कोई भी स्थानान्तरण नहीं किया जायेगा। परीक्षा फार्म भरने के बाद स्थानान्तरण स्वीकार नहीं होगी।
(2) इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध एक महाविद्यालय/संस्थान से दूसरे महाविद्यालय/संस्थान में स्थानान्तरण हेतु पूर्व महाविद्यालयों/संस्थानों के प्राचार्यों/निदेशकों के अनापत्ति पर द्वितीय/तृतीय/चतुर्थ वर्ष में सीट उपलब्ध होने पर, दूसरे (जिस महाविद्यालय/संस्थान में स्थानान्तरण चाहता है) महाविद्यालय संस्थान के प्राचार्य/निदेशक के द्वारा विवेकानुसार प्रवेश स्थानान्तरण स्वीकृत किया जा सकेगा। यह सुविधा एक ही शहर के मध्य स्थित महाविद्यालयों/संस्थानों के छात्रों को अनुमन्य नहीं होगी।
(3) किसी भी दशा में छात्र का प्रथम वर्ष में स्थानान्तरण प्रवेश अनुमन्य नहीं होगा।
(4) अन्य विश्वविद्यालय के छात्र को इस विश्वविद्यालय से सम्बद्ध महाविद्यालय/संस्थान में स्थानान्तरण प्रवेश हेतु महाविद्यालय के प्राचार्य से अनापत्ति लेकर महाविद्यालय से सम्बन्धित समस्त विषयों की आख्या सहित विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराकर विश्वविद्यालय से अनुमति प्राप्त करना आवश्यक होगा।
(5) स्ववित्त पोषित संस्थानों/पाठ्यक्रमों में प्रवेशित छात्रों का स्थानान्तरण अनुदानित महाविद्यालयों/पाठ्यक्रमों में नहीं किया जायेगा। व्यवसायिक पाठ्यक्रमों/संस्थानों में स्थानान्तरण प्रवेश विश्वविद्यालय की पूर्व अनुमति पर ही अनुमन्य होगा।
(ङ) स्नातक कक्षाओं में प्रवेश, बिना प्रवेश परीक्षा के प्रवेश की स्थिति में, कुल सीटों की अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीटें उन विद्यार्थियों के द्वारा भरी जा सकती हैं जिन्होंने इन्टरमीडिएट की परीक्षा यू0पी0 बोर्ड के अतिरिक्त अन्य बोर्ड या विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की हो। (जैसे:- सी०बी०एस०ई०,आई०सी०एस०ई० आदि) किन्तु उनके योग्यता प्राप्तांक उ०प्र० बोर्ड के सामान्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों से कम नहीं होने चाहिए। स्ववित्त पोषित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में शिक्षण माध्यम अंग्रेजी होने के कारण उक्त नियम लागू नहीं हैं।
(च) प्रवेश वरीयता सूची तैयार करने हेतु स्नातक/स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश हेतु अर्ह परीक्षा में दो वर्ष के अन्तराल से ज्यादा अन्तराल पर  प्रयोगात्मक विषयों की डिग्री को छोड़कर प्रवेश अनुमन्य नहीं होगा। अन्तराल के वर्षों में कुल प्राप्तांकों से 2 प्रतिशत प्रति वर्ष कटौती की जायेगी। यह नियम केवल प्रथम वर्ष के प्रवेश पर लागू होगा।
(छ) वे विद्यार्थी प्रथम वर्ष के उपाधि पाठ्यक्रम में प्रवेश के अधिकारी नहीं होंगे, जिन्होंने हाई स्कूल एवं इन्टरमीडिएट की परीक्षा, मान्यता प्राप्त समकक्ष बोर्ड या विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण नही की होगी।
(ज) वे विद्यार्थी प्रथम वर्ष स्नातकोत्तर परीक्षा के लिए योग्य/पात्र नहीं होंगे, जिन्होंने 10$2$3 पद्धति (पैटर्न) के अन्तर्गत स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की होगी। उनकी हाई स्कूल, इन्टरमीडिएट तथा स्नातक परीक्षायें मान्यता प्राप्त समकक्ष बोर्ड तथा विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण होनी चाहिए।
नोट 2. विद्यार्थी जिन्होंने कोई भी परीक्षा निम्नलिखित बोर्डो/विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है, इस विश्वविद्यालय के किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए अर्ह नहीं है।
अमान्य बोर्ड के नाम:
1. अखिल भारतीय माध्यमिक शिक्षा परिषद, दिल्ली (All India Boad of Secondary Education, Azad Pur, Delhi)
2. केन्द्रीय उच्चतर शिक्षा परिषद, उत्तम नगर, नई दिल्ली (Central Board of Higher Education, East Patel Nagar, New Delhi)
3. केन्द्रीय उच्च शिक्षा परिषद, पूर्व पटेल नगर, नई दिल्ली (Central Board of High Education, East patel Nagar, new Delhi)
4. वयस्क एवं तकनीकी शिक्षा परिषद् अलीगंज, मुबारकपुर, नई दिल्ली (Board of Adult Education & Training, Aligang, Mubarkpur, New Delhi)
5. गुरूकुल विश्वविद्यालय, वृन्दावन (Gurukul Vishvavidyalaya, Vaindavan) 
                6. माध्यमिक शिक्षा परिषद्, नई दिल्ली/इलाहाबाद
                7. एम.एच. एजूकेशनल विद्यापीठ, जौनपुर।
2. महाविद्यालय प्रवेश करते समय एक सेक्शन में सामान्यतः 60 अभ्यर्थियों के प्रवेश करेंगे तथा किसी भी दशा में कुलपति की पूर्व अनुमति प्राप्त कर 80 से अधिक अथवा विश्वविद्यालय द्वारा
अनुमत संख्या से अधिक प्रवेश नहीं करेंगे किन्तु कुलपति की अनुमति पर अधिकतम 80 प्रवेश किये जा सकते हैं।
3. संस्थागत विद्यार्थी के रूप में एक स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त अभ्यर्थी को अन्य स्नातकोत्तर कक्षा में तब ही प्रविष्ट किया जाएगा जब तक उस विषय में व्यक्तिगत परीक्षा देने  का प्रावधान न हो।
4. यदि कोई विद्यार्थी दूसरी स्नातकोत्तर डिग्री के लिए प्रवेश लेना चाहता है तो उसे प्रवेश तभी मिलेगा, जब उसने उस विषय का अध्ययन स्नातक स्तर पर भी किया हो एवं ऐसे विषय में
व्यक्तिगत परीक्षा देने का प्रावधान न हो।
5. किसी भी विद्यार्थी को प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम वाले स्नातकोत्तर विषय में प्रवेश की अनुमति नहीं मिलेगी, यदि उसने वह विषय स्नातक स्तर पर नहीं लिया है चाहे अभ्यर्थी ने उस विषय से
प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण कर ली हो।
6. अभ्यर्थी, जिसकी उपस्थिति शैक्षिक सत्र के प्रत्येक पाठ्यक्रम में पूरी हो किन्तु यदि वह परीक्षा में सम्मिलित नहीं हो पाता है या अनुत्तीर्ण हो जाता है तो विश्वविद्यालय परीक्षा हेतु उसे
संस्थागत विद्यार्थी के तौर पर पुनः प्रवेश नहीं दिया जायेगा। उसे वह परीक्षा एक पूर्व-विद्यार्थी के रूप में ही उत्तीर्ण करनी होगी। विद्यार्थी जिसने विश्वविद्यालय परीक्षा का फार्म नही भरा
होगा, उसे पूर्व विद्यार्थी के रूप में परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जायेगी।
7. विद्यार्थी की वरीयता सूची को आंकने के लिए प्रवेश परीक्षा के समय निम्नलिखित भारांक दिए जाएंगे।
(अ) 4 प्रतिशत अधिभार उन विद्यार्थी के लिए, जिन्होंने राष्ट्रीय/प्रदेशीय/अनतर्विश्वविद्यालय स्तर पर खेलों में भाग लिया हो।
(ब) 4 प्रतिशत अधिभार चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के (स्नातक/परास्नातक) छात्रों के लिए।
(स) 4 प्रतिशत अधिभार चैधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय/सम्बद्ध कालेजों के शिक्षकों/कर्मचारियों के (पुत्र/पुत्री/पत्नी/पति) के लिए।
(द) (1) 3 प्रतिशत अधिभार उन विद्यार्थियों के लिये जिन्होंने छब्ब् का ष्ब्ष् या ष्ळ.प्प्ष् सार्टिफिकेट प्राप्त किया हो।
अथवा
(2) 2 प्रतिशत अधिभार उन विद्यार्थियों के लिये जिन्होंने छब्ब् का ष्ठष् या ष्ळ.1ष् सार्टिफिकेट प्राप्त किया हो।
अथवा
(3) 3 प्रतिशत अधिभार उन अभ्यर्थियों के लिए, जिन्होंने एन०एस०एस० के अन्तर्गत 240 घण्टों की सेवा की हो तथा 10-10 दिनों के 2 कैम्पों में भाग लिया हो अथवा 2 प्रतिशत अथिभार
उनके लिए जिन्होंने 240 घण्टों की सेवा तथा 10 दिनों का एक कैम्प किया हो अथवा 1 प्रतिशत अधिभार उनके लिये जिन्होंने 240 घण्टों की सेवा की हो या 120 घण्टों की सेवा
तथा ऐसा 1 कैम्प किया हो।
अथवा
(य) स्काउटिंग में तथा रेंजर/रोवर गतिविधि में भाग लेने वाले अभ्यर्थियों हेतु अधिभार निम्न प्रकार होगा-
(1) 1 प्रतिशत अधिभार-द्वितीय सोपान/ध्रुवपद परीक्षा उत्तीर्ण करने पर।
अथवा
(2) 2 प्रतिशत अधिभार-तृतीय सोपान/गुरूपद/प्रवीण परीक्षा उत्तीर्ण करने पर।
अथवा
(3) 3 प्रतिशत अधिभार-राज्यपाल द्वारा सम्मानित होने/निपुण परीक्षा उत्तीर्ण करने पर।
अथवा
(4) 4 प्रतिशत अधिभार-भारत सरकार के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होने पर।
(र) इण्टरमीडिएट स्तर पर एन०एस०एस० में प्रतिभागी के स्नातक स्तर पर प्रवेश के लिये 10 अंक दिए जाएंगे तथा
यह अंक अर्हता परीक्षा के कुल प्राप्तांकों में जोड़े जाएंगे।
नोट:-
(1) किसी भी स्थिति में अभ्यर्थी को 8 प्रतिशत से अधिक का अधिभार नही दिया जायेगा, लेकिन विश्वविद्यालय/महाविद्यालय कर्मचारी के पुत्र/पुत्री/पत्नी/पति को अधिकतम 12 प्रतिशत तक अधिभार दिया जा सकता है।
(2) किसी अधिभार के आधार पर द्वितीय श्रेणी प्राप्त छात्र प्रथम श्रेणी छात्र से और तृतीय श्रेणी प्राप्त छात्र द्वितीय श्रेणी प्राप्त छात्र से उच्चतर प्राथमिकता प्राप्त नही कर सकेगा अर्थात् प्राथमिकता पर अधिभार अंको का कोई प्रभाव नहीं होगा।
(3) मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय स्तर पर ख्ेालकूद में भाग लेने वाले छात्रों को सम्बन्धित अधिकारी द्वारा निर्गत प्रमाण-पत्र के  आधार पर कुलपति की विशेष अनुमति के बाद प्रवेश दिया जा सकता है। प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश की स्थिति में यह प्रावधान लागू नहीं होगा। ऐसे प्रमाण-पत्रों की जाँच एवं प्रवेश अधिकारी की सन्तुष्टि आवश्यक है।
(4) नियम 7 (अ) के अन्तर्गत अधिभार स्नातकोत्तर और एल०एल०-बी० कक्षाओं में प्रवेश हेतु तभी देय होगा जबकि अभ्यर्थी ने राष्ट्रीय/प्रदेशीय/अन्तर्विश्वविद्यालय ख्ेालों में महाविद्यालय/विश्वविद्यालय स्तर पर अध्ययन करते हुए भाग लिया हो। इन्टर काॅलिज के स्तर पर भाग लेने वालों को यह अधिभार केवल स्नातक कक्षाओं में प्रवेश हेतु मान्य होगा। ऐसे प्रकरण-पत्रों की जाँच के लिये प्रवेश अधिकारी की संस्तुति आवश्यक है।
8. कोई भी विदेशी विद्यार्थी किसी भी महाविद्यालय द्वारा किसी पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश का पात्र नहीं होगा जब तक कि उसको जनपद के पुलिस अधीक्षक अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्रदान न कर दें, विश्वविद्यालय से सम्बद्ध किसी भी महाविद्यालय में विदेशी विद्यार्थी को व्यक्तिगत परीक्षा में सम्मिलित नहीं किया जाएगा।
9. इस विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता प्राप्त किसी अन्य विश्वविद्यालय से 10$2$3 या 11$1$3 पैटर्न की परीक्षा पूर्ण करने के बाद दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम का प्रथम वर्ष उत्तीर्ण कर चुका या 10$2 या 11$1 पैटर्न की परीक्षा पूर्ण करने के उपरान्त तीन वर्षीय/चार वर्षीय स्नातक उपधि उपरान्त के पाठ्यक्रम का प्रथम वर्ष/द्वितीय वर्ष/तृतीय वर्ष उत्तीर्ण कर चुका अभ्यर्थी द्वितीय वर्ष/तृतीय वर्ष/चतुर्थ वर्ष में प्रवेश ले सकता है, प्रतिबन्ध यह होगा कि वह इस विश्वविद्यालय द्वार संचालित पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष और तीन वर्षीय/चार वर्षीय  पाठयक्रम के प्रथम वर्ष/द्वितीय वर्ष/तृतीय वर्ष में लगभग समान पाठ्यक्रम पढ़ चुका हो। पाठ्यक्रम का सामजंस्य एल० एल० बी० के प्रकरण में स्वीकार्य नहीं होगा। यह प्रवेश नियम 10 के मान्य होने की स्थिति के अधीन होगा।
10. एक अभ्यर्थी को संस्थागत रूप में बी०ए०/बी०एस०-सी०/बी० काम/एल०-एल०बी० 6 वर्ष की अधिकतम अवधि में एम०ए०/एम०एस०सी०/एम०एस०-सी० (कृषि)/एम०काम०/एल०-एल०एम० चार वर्ष में, किन्तु स्नातक एवं स्नातकोत्तर डिग्री परीक्षा अधिकतम सात वर्षों में पूर्ण करनी होगी तथा बी०एड० और एम०एड० तीन वर्ष में, बी०एस०-सी० (कृषि) 8 वर्ष में पूर्ण करनी होगी। तीन/चार/छः/सात/आठ वर्ष की अवधि उस शैक्षिक सत्र से मानी जायेगी, जिसमें उसने प्रथम बार प्रवेश लिया हो। उक्त अवधि के समाप्त होने के उपरान्त उसका अभ्यर्थन स्वतः समाप्त हो जायेगा।
11. एम०-एस०सी० (समस्त विषय) और एम०ए० गणित, भूगोल, मनोविज्ञान, संगीत और चित्रकला में प्रवेश परीक्षा/योग्यताक्रम के आधार पर प्रवेश हेतु निर्धारित विषयों में प्रवेश के लिए निम्न नियम अतिरिक्त होंगे-
(1) महाविद्यालय, विषय के लिए निर्धारित सीटों से अधिक छात्रों को प्रवेश नहीं देंगे।
(2) एम०-एस०सी० और एम०ए० में प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता यथास्थिति बी०एस०-सी०/बी०ए० में ऊपर बताये नियमों के अनुसार द्वितीय श्रेणी के साथ सम्बन्धित विषय में कम से कम 50 प्रतिशत अंक होने अपेक्षित हैं। उपर्युक्त वर्णित न्यूनतम योग्यता सीमाएं एस०सी०/एस०टी० के अभ्यर्थियों के लिए मान्य नहीं होगी, उनके लिए उत्तीर्ण होना ही पर्याप्त होगा किन्तु प्रवेश योग्यता क्रमानुसार ही होंगे।
(3) प्रस्तर 11 पर दिये गये विषयों से अलग एम० ए० के ऐसे विषय जिनमें प्रयोगात्मक पाठ्यक्रम नहीं है एवं एम०एस०-सी० (गणित) में प्रवेश हेतु द्वितीय श्रेणी या न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक का कोई प्रतिबन्ध नहीं होगा।
(4) एम०एस०-सी० और एम०ए० (प्रयोगात्मक विषय) में प्रवेश के लिये चुने गये विषय का स्नातक स्तर पर मुख्य विषय के रूप में होना आवश्यक है। सहायक (Subsidiary)  विषय मान्य नहीं होगा। एम०एस०-सी० सांख्यिकी हेतु प्रवेश के लिए स्नातक स्तर पर गणित/सांख्यिकी विषय होना अनिवार्य है। परन्तु एम०एम० प्रयोगात्क विषयों में उपर्युक्तानुसार अर्ह अभ्यथियों की संख्या स्वीकृत सीटों से कम होने की स्थिति में सहायक विषय मान्य होंगे।
(5) विद्यार्थी की योग्यता का निर्णय तीन वर्षीय उपाधि की परीक्षा में प्राप्त कुल अंकों के साथ उस विषय में प्राप्त अंकों जिसमें उसे प्रवेश लेना है, को जोड़कर किया जायेगा। विषय में प्राप्त अंकों की गणना स्नातक स्तर के तीनों वर्षों के लिखित परीक्षा में प्राप्त पूर्ण अंकों तथा प्रयोगात्मक परीक्षा में प्राप्तांकों के आधे अंकों को जोड़कर की जाएगी। इस प्रतिशत में नियमानुसार देय अधिभार अंक भी जोड़े जाएगें।
(6) ऊपर इंगित विषयों में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की एक सम्पूर्ण सूची महाविद्यालय द्वारा तैयार की जाएगी और पूर्ण विवरण के साथ चयन एवं प्रतीक्षा सूची प्रवेशोपरान्त एक सप्ताह के अन्तर्गत विश्वविद्यालय को भेज दी जानी चाहिए।
(7) एम०ए० गैर प्रयोगिक विषय में प्रवेश हेतु ऐसे अभ्यर्थी जिन्होंने स्नातक स्तर पर सम्बन्धित विषय में परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, यदि प्रवेश हेतु आवेदन करता है तो योग्यता सूची तैयार करते समय अभ्यर्थी के कुल प्राप्तांक प्रतिशत से 5 प्रतिशत की कटौती की जायेगी।
13. (1) बी०काॅम प्रथम वर्ष के प्रवेश प्रकरण में योग्यता सूची तैयार करते समय उन विद्यार्थियों को 5 प्रतिशत अधिभार दिया जाएगा जिन्होंने 10$2 काॅमर्स से उत्तीर्ण किया हो। बी०काॅम० में प्रवेश के लिए मैरिट लिस्ट तैयार करते समय प्रवेश के लिए इन्टरमीडिएट की परीक्षा में प्राप्तांकों को आधार माना जाएगा। इन्टरमीडिएट परीक्षा व्यावसायिक पाठ्यक्रम के साथ उत्तीर्ण करने की स्थिति में लिखित परीक्षा के प्राप्तांक जोड़े जायेंगे, प्रयोगात्मक विषयों के नहीं।
(2) बी०ए० में प्रवेश लेने वाले ऐसे अभ्यर्थी के, जिसने इन्टरमीडिएट विज्ञान, वाणिज्य और कृषि पाठ्यक्रम से उत्तीर्ण किया है, अर्हता परीक्षा के प्राप्तांक प्रतिशत में से (योग्यता की गणना के लिए) 5 प्रतिशत अंक घटा दिये जायेंगे।
(3) व्यावसायिक पाठ्क्रमों में प्रवेश विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार महाविद्यालयों द्वारा किये जायेंगे। अर्ह परीक्षा में स्नातकोत्तर स्तरीय तथा स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु 45 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। परन्तु ैब्ध्ैज् के अभ्यर्थियों के सम्बन्ध उक्त पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु अर्ह परीक्षा उत्तीर्ण छात्र प्रवेश हेतु पात्र होंगे।
(2) बी0एड0/एम0एड0 पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु छब्ज्म् के मानक मान्य होंगे।
14. (1) विश्वविद्यालय परीक्षा में अनुचित साधनों का प्रयोग तथा गलत आचरण करने वाले किसी अभ्यर्थी को उस जनपद के किसी भी महाविद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। यह नियम उस विद्यार्थी पर लागू नहीं होगा, जो विश्वविद्यालय द्वारा अनुचित साधन एवं गलत आचरण का दोषी नही पाया जाएगा।
(2) ऐसे किसी अभ्यर्थी को जो कि पुलिस रिकाॅर्ड के अनुसार हिस्ट्रीशिटर हो या नैतिक पतन के किसी अपराध में  अथवा किसी अपराधिक मामले में सम्मिलित हो, विश्वविद्यालय के किसी भी महाविद्यालय में प्रवेश नहीं दिया जायेगा और यदि उसे प्रवेश दे दिया गया है तो बिना किसी पूर्व सूचना के निरस्त कर दिया जायेगा।
(3) किसी भी महाविद्यालय के प्राचार्य को किसी भी अभ्यर्थी के प्रवेश या पुनः प्रवेश को महाविद्यालय में अनुशासन बनाये रखने के हित में बिना कारण बताए निरस्त करने का अधिकार होगा।
(4) किसी भी महाविद्यालय में किसी भी विद्यार्थी का प्रवेश नियमों के विरूद्ध होने पर अथवा गलत तथ्यों के  आधार पर होने की स्थिति में कुलपति/प्राचार्य द्वारा निरस्त किया जा सकता है।
(5) अनुशासन मंडल के अनुसार रेगिंग करने या वातावरण को दूषित करने अथवा विश्वविद्यालय/महाविद्यालय अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध दुव्र्यवहार या दूषित वातावरण उत्पन्न करने का दोषी पाये गये किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा तथा उसका प्रवेश हो जाने पर भी बिना कारण बताये निरस्त किया जा सकता है। माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार निम्न कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी:-"If any incident of ragging comes to the notice of the authority the concerned student shall be given freedom to explain, and if not found satisfactory, the authority has the right to, expel him from the institution"
(6) कोई भी विद्यार्थी, जिसे एक संस्थागत विद्यार्थी के रूप में सात साल हो चुके हैं, बी०एड०, एम०एड०, एल०-एल०बी०, एल-एल०एम० के अतिरिक्त किसी कक्षा में प्रविष्ट नहीं किया जाएगा।
15. (1) बी०एड० और एम०एड० की कक्षाओं में प्रवेश राज्य सरकार और एन०सीटी०ई० द्वारा निर्धारित नियमों केे  आधार पर किया जायेगा। प्रवेश के सम्बन्ध में विश्वविद्यालय के नियम बी०एड०, एम०एड० के विद्यार्थियों पर भी लागू होंगे। 
16. एक अभ्यर्थी, जो किसी अन्य विश्वविद्यालय से सम्बघित द्वितीय वर्ष/तृतीय वर्ष/चतुर्थ वर्ष की परीक्षा में अनुत्तीर्ण हुआ है, इस विश्वविद्यालय में द्वितीय/तृतीय/चतुर्थ वर्ष में प्रवेश के लिए स्वीकार्य नहीं होगा।
17. एक अभ्यर्थी, जो कोई ओरियन्टल परीक्षा उत्तीर्ण कर चुका है, किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए स्वीकार्य नहीं होगा, जब तक वह इस विश्वविद्यालय द्वारा दिये गये अर्हता सम्बन्धी आवश्यक प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं करता।
18. (1) एम०काॅम० के प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए बी०काॅम० परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। एक अभ्यर्थी, जिसने बी०ए०/बी०एस-सी० परीक्षा, अर्थशास्त्र और/या गणित को प्रमुख विषय के रूप में लेकर उत्तीर्ण की है और सहायक विषयों के रूप में नहीं, एम०काॅम० प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने के लिए अर्ह होगा, लेकिन उसे एम०काॅम० के प्रथम वर्ष में अर्हता पाठ्यक्रम में उत्तीर्ण होना आवश्यक होगा। (2) बी०बी०ए० और बी०सी०ए० की परीक्षा क्रमशः बी०काॅम० तथा बी०एस-एस० (गणित) की स्नातक उपाधि के समतुल्य मानी जाएगी।
19. अभ्यर्थी, जिसने स्नातक परीक्षा एकल वर्ष 1998 के बाद उत्तीर्ण की है, विश्वविद्यालय/महाविद्यालय में प्रवेश के लिए योग्य नहीं माना जाएगा।
20. यदि किसी अभ्यर्थी ने किसी अन्य विश्वविद्यालय से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की है तो उसे स्नातक स्तर पर एकल विषय में प्रविष्ट नहीं किया जाएगा।
21. अभ्यर्थी, जिसने द्विवर्षीय स्नातक परीक्षा किसी अन्य विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है, इस विश्वविद्यालय में ब्रिज पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए योग्य नहीं माना जाएगा।
22. (1) अभ्यर्थी जिसने मध्यमा/शास्त्री परीक्षा, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से उत्तीर्ण की है, इस विश्वविद्यालय में बी०ए० प्रथम/एम०ए० प्रथम (संस्कृत) में प्रवेश लेने के योग्य माना जायेगा।
(2) अभ्यर्थी, जिसने शास्त्री परीक्षा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्य विश्वविद्यालय से 10$2$3 शिक्षा पद्धति के अन्तर्गत उत्तीर्ण की है, वह बी0एड0 पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु  अर्ह होगा। (समकक्षता समिति की बैठक दिनांक 05-06-2004 मे लिये गये निर्णयानुसार)
23. अभ्यर्थी, जिसने कोई भी परीक्षा साहित्य सम्मेलन प्रयाग/इलाहाबाद से उत्तीर्ण की है, विश्वविद्यालय के किसी भी पाठ्यक्रम में अध्ययन के लिए प्रवेश लेने के योग्य नहीं माना जायेगा।
24. (1) कोई भी अभ्यर्थी, जिसने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम का प्रथम वर्ष या स्नातक पाठ्यक्रम का प्रथम वर्ष या द्वितीय वर्ष व्यक्तिगत अभ्यर्थी के रूप में उत्तीर्ण किया है, संस्थागत अभ्यर्थी के रूप में प्रथम वर्ष या द्वितीय वर्ष में प्रविष्ट नहीं किया जाएगा।
(2) यदि कोई स्थान स्नातक पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष या द्वितीय वर्ष में संस्थागत पाठ्यक्रम में खाली रहता है, तो वह सांध्यकालीन कक्षाओं के विद्यार्थियों से योग्यता के आधार पर और उसी शुल्क पर, जो संस्थागत विद्यार्थियों से लिया जाता है, भरा जा सकता है।
25. कोई भी अभ्यर्थी स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए तकनीकी शिक्षा बोर्ड, यू०पी० या अन्य किसी दूसरे बोर्ड से प्राप्त किसी डिप्लोमा के आधार पर योग्य नही समझा जायेगा। (विश्वविद्यालय के कोई भी पूर्ववर्ती निर्णय ऐसे डिप्लोमा के बारे में निरस्त माना जाएगा।)
26. कोई भी विद्यार्थी किसी भी विश्वविद्यालय परीक्षा में बैठने के लिए अनुमत नहीं होगा, जब तक वह अर्हता परीक्षा उत्तीर्ण कर उस परीक्षा में बैठने योग्य न हो।
महाविद्यालय अस्थायी प्रवेश के लिये अभ्यर्थी का परीक्षा फाॅर्म, बिना योग्यता परीक्षा का परिणाम जाने, विश्वविद्यालय को प्रेषित नहीं करेंगे।
27. कोई भी विद्यार्थी विश्वविद्यालय परीक्षा में तब तक नहीं बैठ पायेगा, तब तक वह न्यूनतम निर्धारित उपस्थिति पूरी न करता हो।
28. पुनः परीक्षा में बैठने योग्य अभ्यर्थी का उसी उपाधि की अगली कक्षा में अस्थायी प्रवेश स्वीकार्य होगा और वह पुनः परीक्षा के साथ अगले साल की परीक्षा देगा। यदि किसी कारण से अभ्यर्थी पुनः परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाता तो उसका अस्थायी प्रवेश रद्द कर दिया जायेगा तथा उसे सभी विषयों में पूर्व विद्यार्थी के रूप में पूर्ण परीक्षा देनी होगी। परन्तु स्नातकोत्तर प्रथम वर्ष में प्रवेश के समय स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है।
29. यदि कोई अभ्यर्थी कृपांक की सहायता से परीक्षा उत्तीर्ण करता है या उसकी श्रेणी सुधरती है तो वह नियमानुसार देय लाभ का अधिकारी होगा किन्तु मैरिट सूची में इसका प्रभाव मान्य नहीं होगा।
30. आरक्षित श्रेणी का कोई अभ्यर्थी यदि उच्चतर योग्यता के कारण सामान्य श्रेणी में प्रवेश के लिए चुन लिया जाता है तो उस श्रेणी के लिए आरक्षित स्थानों की संख्या कम नहीं होगी। किसी नियम की अज्ञानता उसके उल्लंघन का बहाना नहीं मानी जाएगी।
31. व्यक्तिगत रूप से स्नातक/स्नातकोत्तर की परीक्षाओं में सम्मिलित होने हेतु अर्हता/समकक्षता आदि के नियम संस्थागत परीक्षार्थियों की भाँति ही लागू होंगे।
32. विश्वविद्यालय के समस्त पाठ्यक्रमों के प्रवेशों ेमं सत्र 2009-10 से छात्राओं को क्षैतिज  आधार पर 20 प्रतिशत का आरक्षण प्रदान किया जायेगा।